El Nino Weather Alert: देश में इस बार मानसून का मिजाज पूरी तरह बदला हुआ नजर आ रहा है। एक ओर मुंबई और महाराष्ट्र के कई इलाके लगातार बारिश और जलभराव से जूझ रहे हैं, तो दूसरी ओर दिल्ली, पंजाब और हरियाणा जैसे राज्य बारिश की कमी के कारण सूखे जैसे हालात का सामना कर रहे हैं। मौसम विशेषज्ञों का मानना है कि इसके पीछे प्रमुख वजह अल-नीनो का प्रभाव है, जिसने पूरे मानसूनी पैटर्न को असंतुलित कर दिया है। मौसम में बदलाव अल-नीनो एक प्राकृतिक जलवायु प्रक्रिया है, जिसमें प्रशांत महासागर के मध्य और पूर्वी हिस्से का तापमान सामान्य से अधिक हो जाता है। इसका असर दुनिया भर के मौसम पर पड़ता है। भारत में यह स्थिति आमतौर पर मानसून को कमजोर करती है और वर्षा के वितरण को असमान बना देती है। इसी कारण कुछ क्षेत्रों में अत्यधिक बारिश होती है, जबकि कई हिस्सों में बादल भी नहीं बरसते। पानी-पानी मुंबई मुंबई में मानसून भले ही अपेक्षाकृत देर से पहुंचा हो, लेकिन उसके बाद हुई तेज बारिश ने शहर की रफ्तार थाम दी। कई इलाकों में जलभराव, ट्रैफिक जाम और बाढ़ जैसे हालात देखने को मिले। विशेषज्ञों का कहना है कि अरब सागर से मिलने वाली अतिरिक्त नमी और पश्चिमी घाट की भौगोलिक स्थिति ने यहां बारिश की तीव्रता बढ़ा दी। वहीं खराब ड्रेनेज व्यवस्था ने समस्या को और गंभीर बना दिया। दिल्ली-उत्तर भारत में सूखा इसके विपरीत दिल्ली और उत्तर भारत के कई हिस्सों में मानसून कमजोर बना हुआ है। बारिश की कमी के कारण तापमान में राहत नहीं मिल रही और उमस लोगों को परेशान कर रही है। खेतों में खरीफ फसलों की बुवाई भी प्रभावित होने लगी है। किसानों की चिंता बढ़ रही है क्योंकि पर्याप्त वर्षा के बिना खेती पर सीधा असर पड़ सकता है। कहीं बाढ़ तो कहीं सूखा मौसम वैज्ञानिकों के अनुसार अल-नीनो केवल बारिश की मात्रा ही नहीं, बल्कि उसके वितरण को भी प्रभावित करता है। यही वजह है कि देश के अलग-अलग हिस्सों में मौसम का व्यवहार बिल्कुल विपरीत दिखाई दे रहा है। जुलाई और अगस्त मानसून के सबसे महत्वपूर्ण महीने माने जाते हैं और विशेषज्ञों का अनुमान है कि आने वाले सप्ताहों में भी यही असमानता बनी रह सकती है। कुछ क्षेत्रों में भारी बारिश और बाढ़ की स्थिति बन सकती है, जबकि कई इलाकों में वर्षा सामान्य से कम रह सकती है। बदलते मौसम की चेतावनी विशेषज्ञों का मानना है कि जलवायु परिवर्तन और अल-नीनो का संयुक्त प्रभाव मौसम को और अधिक अनिश्चित बना रहा है। ऐसे में जल संरक्षण, बेहतर मौसम पूर्वानुमान और कृषि प्रबंधन की आवश्यकता पहले से कहीं अधिक बढ़ गई है। फिलहाल मुंबई की जलभराव वाली तस्वीरें और दिल्ली की सूखी जमीन यह संकेत दे रही हैं कि बदलते मौसम के इस दौर में सतर्कता और तैयारी ही सबसे बड़ा बचाव है। ये भी पढ़ें: धूल भरी आंधी से दिल्ली-NCR बेहाल, कई इलाकों में जाम; अगले 3 घंटे बारिश की चेतावनी